नरक चतुर्दशी 2025 (छोटी दिवाली): तिथि, पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

नरक चतुर्दशी 2025 (छोटी दिवाली): तिथि, पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त
नरक चतुर्दशी 2025 (छोटी दिवाली): तिथि, पूजा विधि, महत्व और शुभ मुहूर्त

When: 1st November
Where: All Over India

नरक चतुर्दशी 2025 (छोटी दिवाली 2025)

📅 तिथि व समय (2025 में नरक चतुर्दशी कब है?)

  • नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली): शनिवार, 1 नवंबर 2025

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर 2025, सुबह 02:44 बजे

  • चतुर्दशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2025, सुबह 04:26 बजे

नरक चतुर्दशी का महत्व

नरक चतुर्दशी को छोटी दिवाली भी कहा जाता है और यह पर्व दीपावली से एक दिन पहले मनाया जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध कर 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया था।
इसी कारण इस तिथि को नरक चतुर्दशी कहते हैं और इसे बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक माना जाता है।

इस दिन स्नान और दीपदान का विशेष महत्व होता है। इसे रूप चौदस भी कहा जाता है क्योंकि मान्यता है कि इस दिन उबटन व स्नान करने से रोग दूर होते हैं और आयु, स्वास्थ्य और सौंदर्य की वृद्धि होती है।

नरक चतुर्दशी की पूजा विधि

  1. स्नान व उबटन:
    प्रातःकाल सूर्योदय से पहले स्नान किया जाता है। कई लोग तेल मलकर स्नान करते हैं जिसे नरक स्नान कहा जाता है।

  2. दीपदान:
    संध्या के समय घर, आंगन और मंदिरों में दीपक जलाए जाते हैं। विशेषकर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

  3. पूजन सामग्री:
    दीपक, फूल, रोली, चंदन, मिठाई, धूप और दीपक से भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण व यमराज की पूजा की जाती है।

  4. यम दीपदान:
    इस दिन यमराज के नाम से घर के बाहर दीपक जलाकर रखा जाता है, जिससे अकाल मृत्यु का भय दूर होता है।

धार्मिक मान्यताएँ और लोक परंपराएँ

  • नरक चतुर्दशी पर स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • इसे काली चौदस भी कहा जाता है और कुछ स्थानों पर इस दिन काली माँ की विशेष पूजा होती है।

  • गुजरात और महाराष्ट्र में इसे रूप चौदस के रूप में मनाया जाता है, जिसमें सौंदर्य और स्वास्थ्य की विशेष प्रार्थना की जाती है।

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